अश्विनी को गति, आरंभ, ऊर्जा और उपचार से जुड़ा
नक्षत्र माना जाता है। यह शीघ्र निर्णय लेने,
नई शुरुआत करने और परिस्थितियों में तेजी से
आगे बढ़ने की प्रवृत्ति का संकेत देता है।
स्वामी ग्रह
केतु
देवता
अश्विनी कुमार
प्रतीक
घोड़े का सिर
मुख्य गुण
गति एवं उपचार
संकेत:
पहल, तेज सोच और नई शुरुआत।
भरणी को जिम्मेदारी, धैर्य, सृजन और परिवर्तन
से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है। इसमें परिस्थितियों
का भार उठाने और किसी कार्य को परिणाम तक ले जाने
की क्षमता पर जोर रहता है।
स्वामी ग्रह
शुक्र
देवता
यम
प्रतीक
योनि
मुख्य गुण
धारण एवं परिवर्तन
संकेत:
जिम्मेदारी, सहनशीलता और दृढ़ता।
कृत्तिका अग्नि, शुद्धिकरण, स्पष्टता और दृढ़
निर्णय से जुड़ा माना जाता है। यह अनावश्यक चीजों
को हटाकर किसी विषय को स्पष्ट रूप से देखने की
प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
स्वामी ग्रह
सूर्य
देवता
अग्नि
प्रतीक
चाकू / अग्नि
मुख्य गुण
शुद्धिकरण
संकेत:
स्पष्ट सोच, साहस और निर्णायक स्वभाव।
रोहिणी को आकर्षण, रचनात्मकता, विकास, सौंदर्य
और भौतिक समृद्धि से जोड़ा जाता है। इसमें
सृजनात्मक सोच और चीजों को सुंदर एवं उपयोगी
रूप देने की प्रवृत्ति देखी जाती है।
स्वामी ग्रह
चंद्रमा
देवता
ब्रह्मा
प्रतीक
रथ
मुख्य गुण
सृजन एवं विकास
संकेत:
आकर्षण, कला और समृद्धि की प्रवृत्ति।
मृगशिरा खोज, जिज्ञासा, सीखने और नई चीजों को
जानने की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे
स्वभाव में प्रश्न पूछने और लगातार कुछ नया
तलाशने की प्रवृत्ति प्रमुख हो सकती है।
स्वामी ग्रह
मंगल
देवता
सोम
प्रतीक
हिरण का सिर
मुख्य गुण
खोज एवं जिज्ञासा
संकेत:
जिज्ञासा, शोध और सीखने की प्रवृत्ति।
आर्द्रा तीव्र अनुभव, परिवर्तन, शोध और मानसिक
गहराई से जुड़ा माना जाता है। इसके माध्यम से
कठिन अनुभवों के बाद बदलाव और नई दिशा की
प्रक्रिया को समझा जाता है।
स्वामी ग्रह
राहु
देवता
रुद्र
प्रतीक
आंसू / हीरा
मुख्य गुण
परिवर्तन
संकेत:
गहराई, शोध और परिवर्तन की शक्ति।
पुनर्वसु का संबंध पुनः प्राप्ति, आशा, संरक्षण
और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है। कठिन परिस्थिति
के बाद वापस संतुलन में आने की क्षमता इसका
प्रमुख विषय माना जाता है।
स्वामी ग्रह
गुरु
देवता
अदिति
प्रतीक
तीरों का तरकश
मुख्य गुण
पुनरुत्थान
संकेत:
आशा, पुनः शुरुआत और संतुलन।
पुष्य को पोषण, अनुशासन, ज्ञान और संरक्षण से
जोड़ा जाता है। यह दूसरों की सहायता करने,
जिम्मेदारी निभाने और स्थिर विकास की प्रवृत्ति
का संकेत माना जाता है।
स्वामी ग्रह
शनि
देवता
बृहस्पति
प्रतीक
गाय का थन / कमल
मुख्य गुण
पोषण
संकेत:
अनुशासन, सेवा और संरक्षण।
आश्लेषा को गहरी समझ, अंतर्दृष्टि, रहस्य और
मनोवैज्ञानिक सूझबूझ से जोड़ा जाता है। यह
सतह के पीछे छिपे कारणों को समझने की प्रवृत्ति
को दर्शा सकता है।
स्वामी ग्रह
बुध
देवता
नाग
प्रतीक
कुंडली मारा सर्प
मुख्य गुण
अंतर्दृष्टि
संकेत:
गहरी समझ, बुद्धि और रहस्यमय दृष्टि।
मघा का संबंध पूर्वजों, परंपरा, सम्मान, अधिकार
और वंश से जोड़ा जाता है। यह अपनी जड़ों और
पारिवारिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना
को दर्शाता है।
स्वामी ग्रह
केतु
देवता
पितृ
प्रतीक
सिंहासन
मुख्य गुण
वंश एवं अधिकार
संकेत:
परंपरा, प्रतिष्ठा और नेतृत्व।
11
पूर्वा फाल्गुनी
Purva Phalguni
पूर्वा फाल्गुनी आनंद, रचनात्मकता, आराम,
सौंदर्य और सामाजिक संबंधों से जुड़ा माना जाता है।
इसमें जीवन के सुखद पक्षों और रचनात्मक अभिव्यक्ति
की ओर आकर्षण देखा जाता है।
स्वामी ग्रह
शुक्र
देवता
भग
प्रतीक
पलंग का अगला भाग
मुख्य गुण
आनंद एवं रचनात्मकता
संकेत:
कला, आनंद और सामाजिक आकर्षण।
12
उत्तरा फाल्गुनी
Uttara Phalguni
उत्तरा फाल्गुनी मित्रता, सहयोग, जिम्मेदारी,
अनुबंध और स्थायी संबंधों से जुड़ा माना जाता है।
यह दूसरों के साथ भरोसेमंद और उपयोगी संबंध
बनाने की प्रवृत्ति दर्शाता है।
स्वामी ग्रह
सूर्य
देवता
अर्यमन
प्रतीक
पलंग का पिछला भाग
मुख्य गुण
सहयोग एवं स्थिरता
संकेत:
मित्रता, सेवा और जिम्मेदारी।
हस्त कौशल, बुद्धिमत्ता, कार्यकुशलता और हाथों
से कुछ बनाने की क्षमता से जुड़ा माना जाता है।
यह व्यावहारिक सोच और परिस्थिति को अपने पक्ष
में संभालने की क्षमता का संकेत देता है।
स्वामी ग्रह
चंद्रमा
देवता
सवितृ
प्रतीक
हाथ
मुख्य गुण
कौशल
संकेत:
कार्यकुशलता, चतुराई और हस्तकौशल।
चित्रा सौंदर्य, डिजाइन, रचनात्मकता और आकर्षक
निर्माण से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है। इसमें
किसी विचार को सुंदर और प्रभावशाली रूप देने
की क्षमता पर विशेष जोर रहता है।
स्वामी ग्रह
मंगल
देवता
विश्वकर्मा
प्रतीक
चमकता रत्न
मुख्य गुण
सौंदर्य एवं निर्माण
संकेत:
रचनात्मकता, डिजाइन और आकर्षण।
स्वाती स्वतंत्रता, लचीलापन, सीखने और अपने
तरीके से आगे बढ़ने की प्रवृत्ति से जुड़ा माना
जाता है। परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने
की क्षमता इसका प्रमुख विषय है।
स्वामी ग्रह
राहु
देवता
वायु
प्रतीक
पौधे की कोपल
मुख्य गुण
स्वतंत्रता
संकेत:
स्वतंत्र सोच, लचीलापन और गतिशीलता।
विशाखा लक्ष्य, दृढ़ता, महत्वाकांक्षा और किसी
उद्देश्य तक पहुंचने की इच्छा से जुड़ा माना जाता है।
स्पष्ट लक्ष्य मिलने पर लगातार प्रयास करने की
प्रवृत्ति इसका प्रमुख गुण माना जाता है।
स्वामी ग्रह
गुरु
देवता
इंद्र-अग्नि
प्रतीक
विजय द्वार
मुख्य गुण
लक्ष्य एवं दृढ़ता
संकेत:
लक्ष्य पर ध्यान और निरंतर प्रयास।
अनुराधा मित्रता, सहयोग, भक्ति, अनुशासन और
संगठन से जुड़ा माना जाता है। यह संबंधों में
निष्ठा तथा कठिन परिस्थितियों में स्थिर रहने
की क्षमता को दर्शाता है।
स्वामी ग्रह
शनि
देवता
मित्र
प्रतीक
कमल
मुख्य गुण
मित्रता एवं भक्ति
संकेत:
निष्ठा, मित्रता और संगठन।
ज्येष्ठा वरिष्ठता, सुरक्षा, जिम्मेदारी और
परिस्थितियों को संभालने की क्षमता से जुड़ा
माना जाता है। यह संरक्षण और कठिन समय में
नेतृत्व करने की प्रवृत्ति का संकेत दे सकता है।
स्वामी ग्रह
बुध
देवता
इंद्र
प्रतीक
कुंडल / ताबीज
मुख्य गुण
सुरक्षा एवं नेतृत्व
संकेत:
जिम्मेदारी, संरक्षण और वरिष्ठता।
मूल को जड़, शोध, मूल कारण और गहरी जांच से
जोड़ा जाता है। यह किसी विषय की सतह के बजाय
उसके मूल तक पहुंचने और अनावश्यक चीजों को
हटाने की प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
स्वामी ग्रह
केतु
देवता
निरृति
प्रतीक
जड़ों का गुच्छा
मुख्य गुण
मूल खोज
संकेत:
शोध, गहराई और मूल कारणों की खोज।
20
पूर्वाषाढ़ा
Purva Ashadha
पूर्वाषाढ़ा आत्मविश्वास, उत्साह, दृढ़ विश्वास
और अपने विचारों को व्यक्त करने की शक्ति से
जुड़ा माना जाता है। इसमें आगे बढ़ने और अपने
उद्देश्य के लिए आवाज उठाने की प्रवृत्ति रहती है।
स्वामी ग्रह
शुक्र
देवता
आपः
प्रतीक
हाथी दांत / पंखा
मुख्य गुण
आत्मविश्वास
संकेत:
उत्साह, आत्मविश्वास और दृढ़ विश्वास।
21
उत्तराषाढ़ा
Uttara Ashadha
उत्तराषाढ़ा स्थायी सफलता, धैर्य, सत्यनिष्ठा और
जिम्मेदारी से जुड़ा माना जाता है। इसमें धीरे-धीरे
लेकिन स्थिर रूप से उपलब्धि प्राप्त करने की
प्रवृत्ति को महत्व दिया जाता है।
स्वामी ग्रह
सूर्य
देवता
विश्वदेव
प्रतीक
हाथी दांत
मुख्य गुण
स्थायी विजय
संकेत:
धैर्य, सत्य और दीर्घकालिक सफलता।
श्रवण सुनने, सीखने, ज्ञान प्राप्त करने और
जानकारी को समझने से जुड़ा माना जाता है।
यह अच्छी बात सुनकर उसे जीवन में उपयोग करने
की क्षमता का संकेत दे सकता है।
स्वामी ग्रह
चंद्रमा
देवता
विष्णु
प्रतीक
कान / तीन पदचिह्न
मुख्य गुण
श्रवण एवं ज्ञान
संकेत:
सीखना, सुनना और ज्ञान का विस्तार।
धनिष्ठा ऊर्जा, लय, समूह कार्य, समृद्धि और
उपलब्धि से जुड़ा माना जाता है। इसमें सामूहिक
प्रयास और अपनी क्षमता को सही दिशा में लगाने
की प्रवृत्ति पर जोर रहता है।
स्वामी ग्रह
मंगल
देवता
वसु
प्रतीक
ढोल
मुख्य गुण
लय एवं समृद्धि
संकेत:
ऊर्जा, समूह कार्य और उपलब्धि।
शतभिषा रहस्य, शोध, स्वतंत्र सोच और उपचार
से जुड़ा माना जाता है। इसमें चीजों को गहराई
से समझने और अपने तरीके से समाधान खोजने की
प्रवृत्ति देखी जाती है।
स्वामी ग्रह
राहु
देवता
वरुण
प्रतीक
खाली वृत्त
मुख्य गुण
शोध एवं उपचार
संकेत:
स्वतंत्रता, रहस्य और गहरी खोज।
25
पूर्वाभाद्रपद
Purva Bhadrapada
पूर्वाभाद्रपद गहन चिंतन, तपस्या, परिवर्तन और
आध्यात्मिक खोज से जुड़ा माना जाता है। यह
जीवन के गंभीर विषयों पर विचार करने और भीतर
की यात्रा करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
स्वामी ग्रह
गुरु
देवता
अज एकपाद
प्रतीक
तलवार / अग्नि
मुख्य गुण
तप एवं परिवर्तन
संकेत:
गहन सोच, तपस्या और आध्यात्मिकता।
26
उत्तराभाद्रपद
Uttara Bhadrapada
उत्तराभाद्रपद गहराई, धैर्य, ज्ञान और आंतरिक
स्थिरता से जुड़ा माना जाता है। यह शांत दृष्टि,
गंभीर चिंतन और आध्यात्मिक अनुशासन की ओर
झुकाव का संकेत दे सकता है।
स्वामी ग्रह
शनि
देवता
अहिर्बुध्न्य
प्रतीक
शय्या का पिछला भाग
मुख्य गुण
गहराई एवं ज्ञान
संकेत:
धैर्य, ज्ञान और आंतरिक स्थिरता।
रेवती पोषण, संरक्षण, यात्रा, मार्गदर्शन और
पूर्णता से जुड़ा माना जाता है। यह संवेदनशीलता,
सहानुभूति और दूसरों को सुरक्षित दिशा देने की
प्रवृत्ति का संकेत देता है।
स्वामी ग्रह
बुध
देवता
पूषण
प्रतीक
मछली / ढोल
मुख्य गुण
पोषण एवं मार्गदर्शन
संकेत:
करुणा, सुरक्षा और पूर्णता।